क्योंकि आज फिर महिला दिवस है|

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
हर दिन यही नारा लगाया जाता है|
पेपर हो या टीवी, राजनीती का रंगमंच न्यारा
नारी है सम्मान की अधिकारी, हर और नारा लगाया जाता है|
दामिनी का होता हर दिन चिर-हरण
शाम को दुर्योधन की सभा में, दुसासन उसी को घसीट लाता है|
मानव की मानसिकता वही पुरानी
जिसपे चलायी अपनी हुकूमत, आज कैसे उसके साथ चलें|
बेचारी नहीं आज की नारी हैं हम
अंतरिक्ष हो या समुद्रपताल
अब तक सहते आएं हैं|
हमारी योग्यता कभी न किसी को रास आयी है
मज़बूरी है उनकी जब हमको समानित करते है|
मार अपने एहम को भावो को
धीरे से अपनी आँखों में छिपाते है|
जिन्हें थी दबाने की आदत हमेशा
आज वही नारा नारी का लगते है|
अंतरास्ट्रीय महिला दिवस की इस बेला पर
आज कसम हम खाते  है|
नहीं सहेंगे नहीं हटेंगे, आगे बढ़ते जायेंगे
राहें काटो की हम, अपने होंटों से चुन कर नयी राहें बनाएंगे|

Written By:
नीलम सिंह 

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s